Aug 5, 2017

सातवें केन्द्रीय वेतन आयोग - 1 जनवरी 16 की बजाय 1 जुलाई, 2017 से लागू करने, मूल वेतन की वृद्वि के तारीख से नहीं देने, बकाया नहीं देने के कारण पर वित्त मंत्रालय का संसद में स्टेटमेंट


भारत सरकार
वित्त मंत्रालय
व्यय विभाग

राज्य सभा

अतारांकित प्रश्न संख्या—257

मंगलवार, 18 जुलाई 2017/27 आषाढ़, 1939 (शक)

सातवें केन्द्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों का कार्यान्वयन

257. श्री नीरज शेखर:
क्या वित्त मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे कि:

(क) क्या सरकार ने भत्तों के संबंध में सातवें केन्द्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों को 1 जनवरी, 2016 के बजाए 1 जुलाई, 2017 से कार्यान्वित किया है

(ख) यदि हां, तो इसके कारण और औचित्य क्या हैं

(ग) सातवें केन्द्रीय वेतन आयोग के अंतर्गत भत्तों को 1 जनवरी, 2016 से अथवा वर्धित मूल वेतन के कार्यान्वयन की घोषणा की तारीख से न देने तथा तत्संबंधी बकाया नहीं दिए जाने के कारण क्या हैं(घ) क्या सरकार इसकी समीक्षा करेगी और वर्धित भत्तों को 1 जनवरी, 2016 से लागू करेगी

(ड) यदि हां, तो तत्संबंधी ब्यौरा क्या है, और 

(च) यदि नहीं, तो इसके क्या कारण हैं और विगत 70 वर्षों में वेतन आयोग द्वारा सबसे कम वृ​द्धि किए जाने के कारण क्या हैं?

उत्तर

वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्री अर्जुन राम मेघवाल)

(क) से (ग): भत्तों के संबंध में पिछले केन्द्रीय वेतन आयोगों की सिफारिशों को लागू किए जाने से संबंधित स्थापित परम्परा के अनुसार, भत्तों के संबंध में सातवें केन्द्रीय वेतन आयोग की सिफारिशें भावी प्रभाव से 01.07.2017 से लागू की गई हैं।

भत्तों से संबंधित विद्यमान प्रावधानों में सातवें केन्द्रीय वेतन आयोग द्वारा यथा—संस्तुत सार्थक बदलाव और इस संबंध में प्राप्त अभ्यावेदनों को ध्यान में रखते हुए, भत्तों के संबंध में सातवें केन्द्रीय वेतन आयोग की सिफारिशें सरकार द्वारा एक समिति को भेजी गई थीं। भत्तों से संबंधित समिति जिसने अपनी रिपोर्ट 24.07.2017 को प्रस्तुत कर दी थी, ​की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए सरकार द्वारा ये सिफारिशें 28.06.2017 को अनुमोदित की गई।

(घ) से (च): भत्तों से संबंधित सिफारिशों को लागू करने की तारीख में संशोधन किए जाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। यह वृद्धि भत्तों के संबंध में सातवें केन्द्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों पर आधारित है जो महंगाई भत्ते में वृद्धि के अनुरूप है जैसा कि सातवें केन्द्रीय वेतन आयोग द्वारा अपनी रिपोर्ट के पैरा 8.2.5(4) में उल्लेख किया गया है।